अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह से देश के कई हिस्सों में प्री–मानसून गतिविधियां तेज होने जा रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार, यह बदलाव न केवल मौसम को प्रभावित करेगा, बल्कि दक्षिण–पश्चिम मानसून के समय पर आगमन का भी संकेत दे सकता है। विभाग के अनुसार महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई हिस्सों में गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। इसके अलावा कर्नाटक, रायलसीमा, केरल और तमिलनाडु के आंतरिक क्षेत्रों में भी तेज बारिश और आंधी–तूफान की संभावना जताई गई है।
देशभर में भारी बारिश के आसार
नई दिल्ली.मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अप्रैल के अंत और मई के पहले सप्ताह में देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। गुजरात और कोंकण को छोड़कर लगभग पूरे भारत में यह बदलाव देखने को मिल सकता है, जो कई क्षेत्रों के लिए चौंकाने वाला साबित हो सकता है। प्री–मानसून पीक रेनफॉल (PMPR) को मानसून के आगमन से जोड़कर देखा जाता है। आमतौर पर माना जाता है कि पीएमपीआर के करीब 40 दिनों बाद दक्षिण–पश्चिम मानसून देश की मुख्य भूमि पर पहुंचता है। ऐसे में इस बार की गतिविधियां मानसून के समय को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे रही हैं।
बन रहा है कम दबाव का क्षेत्र
अप्रैल के आखिरी सप्ताह में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों में अच्छी बारिश और मौसमीय हलचल बनाए रखेगा। वहीं 26 अप्रैल से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल तक फैले गंगा के मैदानी इलाकों में एक पूर्व–पश्चिम कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जो व्यापक स्तर पर प्री–मानसून गतिविधियों को बढ़ावा देगा।
सिस्टम के चलते 26 अप्रैल से भारी बारिश!
पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम काफी सक्रिय रहेगा। असम घाटी में गर्त, बांग्लादेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण और बंगाल की खाड़ी में बन रहे सिस्टम के चलते 26 अप्रैल से 2 मई के बीच भारी बारिश और गरज–चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है।दक्षिण भारत और मध्य भारत भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। प्री–मानसून की यह सक्रियता जहां गर्मी से राहत दिला सकती है, वहीं तेज आंधी, बिजली और भारी बारिश के चलते सतर्क रहने की जरूरत भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौर आने वाले मानसून के रुख को तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।










