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मराठवाड़ा में गहराया पानी संकट: संभाजीनगर, जालना और लातूर के 104 गांवों में टैंकरों से हो रही जलापूर्ति

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Summer Water Shortage: मराठवाड़ा में गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी संकट  फिर से iगहराने लगा है। छत्रपति संभाजीनगर, जालना और लातूर जिलों के 104 गांवों और 45 बस्तियों में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो गया है। प्रशासन ने स्थिति से निपटने के लिए 168 टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी है।

महाराष्ट्र खबर 24 | छत्रपति संभाजीनगर

हालांकि पिछले वर्ष मराठवाड़ा में अच्छी बारिश हुई थी और बांधों व जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा हुआ था, फिर भी गर्मी आते ही कई ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराने लगा है। यह समस्या हर वर्ष देखने को मिलती है, जब भूजल स्तर नीचे चला जाता है और गांवों के पारंपरिक जल स्रोत सूखने लगते हैं।

इन जिलों में सबसे अधिक असर

इन सभी क्षेत्रों में लोगों को पीने के पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

  • छत्रपति संभाजीनगर : 82 गांव और 19 वाड़ियां
  • जालना : 20 गांव और 22 वाड़ियां
  • लातूर : 2 गांव और 1 वाड़ी
  • हिंगोली : 3 वाड़ियां

एक सप्ताह में तेजी से बढ़ा संकट

राजस्व विभाग के अनुसार, 30 अप्रैल तक 66 गांव और 34 वाड़ियां पानी की कमी से प्रभावित थीं। लेकिन केवल छह दिनों में, यानी 6 मई तक 38 और गांव तथा 11 अतिरिक्त वाड़ियां संकट की चपेट में आ गईं।

168 टैंकरों से हो रही जलापूर्ति

प्रभावित गांवों में कुल 168 टैंकर लगाए गए हैं, जिनमें-

  • 9 सरकारी टैंकर
  • 159 निजी टैंकर

शामिल हैं। प्रशासन लगातार पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।

329 कुओं का अधिग्रहण

पानी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पूरे मराठवाड़ा में 329 कुओं का अधिग्रहण किया है।

  • 73 कुएं: टैंकर भरने के लिए
  • 256 कुएं: सीधे जलापूर्ति के लिए

बिना टैंकर जलापूर्ति हेतु अधिग्रहित कुएं:

  • छत्रपति संभाजीनगर – 50
  • जालना – 12
  • परभणी – 9
  • हिंगोली – 26
  • नांदेड़ – 58
  • बीड़ – 68
  • लातूर – 33

मानसून पर टिकी उम्मीदें

स्थानीय नागरिकों और प्रशासन की निगाहें अब आगामी मानसून पर टिकी हैं। यदि इस वर्ष भी समय पर अच्छी बारिश होती है, तो जल संकट से राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल ग्रामीण इलाकों में पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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