Maharashtra Drought 2026: महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के दौरान बारिश की कमी और सूखे जैसी स्थिति के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 358 में से 265 तालुकाओं में सूखा घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में कृषि आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर Trigger-1 यानी सूखे की पहली कड़ी लागू की गई है।सरकार ने इसके साथ ही किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए कई राहत उपायों की घोषणा की है।राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में शासन निर्णय (GR) जारी किया गया है। इसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में जमीन के राजस्व में छूट, फसल ऋण के पुनर्गठन, कृषि ऋण वसूली पर रोक, बिजली बिल में राहत, पानी के टैंकर और रोजगार गारंटी के कामों में छूट जैसी सुविधाएं लागू की जाएंगी।
265 तालुकाओं में Trigger-1
खरीफ 2026 में बारिश की कमी और सूखे के अन्य मानदंडों का आकलन करने के बाद राज्य के 265 तालुकाओं में सूखे की स्थिति सामने आई। Maharashtra Drought 2026 कृषि आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर इन तालुकाओं में Trigger-1 लागू किया गया है। इसके बाद राहत एवं पुनर्वास विभाग की ओर से शासन निर्णय जारी किया गया।सरकार के इस फैसले के बाद प्रभावित तालुकाओं में किसानों के लिए निर्धारित सूखा राहत उपाय लागू होंगे। कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने भी कहा है कि अधिसूचना जारी होने के बाद किसानों को निर्धारित रियायतें मिलेंगी और आगे अतिरिक्त राहत पर भी निर्णय लिया जा सकता है।
मराठवाड़ा : 74 तालुकाओं में सूखा
मराठवाड़ा क्षेत्र में सूखे का असर काफी व्यापक है। उपलब्ध जिला-वार जानकारी के अनुसार मराठवाड़ा के सभी 74 तालुकाओं में Trigger-1 लागू किया गया है। इनमें छत्रपति संभाजीनगर के 9, जालना के 8, बीड़ के 11, लातूर के 10, धाराशिव के 8, नांदेड़ के 14, परभणी के 9 और हिंगोली के 5 तालुका शामिल हैं।उत्तर महाराष्ट्र में भी बड़ी संख्या में तालुकाओं को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। नाशिक जिले के 10, धुले के 4, जलगांव के 15, नंदुरबार के 6 और अहिल्यानगर के 14 तालुकाओं का इसमें समावेश है।
किसानों के खेतों का होगा पंचनामा
फसल नुकसान का सही आकलन करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में पंचनामा प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना गया है। खेतों में फसल की वास्तविक स्थिति दर्ज कर नुकसान का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर आगे किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता का निर्धारण किया जाएगा।सरकार की ओर से पहले ही संकेत दिया गया है कि फसल नुकसान की जानकारी जुटाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद किसानों को आर्थिक सहायता देने के संबंध में आगे निर्णय लिया जाएगा।
किसानों को मिलेंगी 12 प्रमुख राहतें
- जमीन राजस्व में छूट : प्रभावित किसानों को जमीन के राजस्व में राहत दी जाएगी।
- फसल ऋण का पुनर्गठन: मौजूदा फसल ऋण को मध्यम अवधि के ऋण में बदलकर उसका पुनर्गठन किया जाएगा।
- कृषि ऋण वसूली पर रोक: खेती से जुड़े ऋणों की वसूली को निर्धारित अवधि के लिए स्थगित किया जाएगा।
- कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत: कृषि पंपों के बिजली बिल को लेकर राहत का प्रावधान किया गया है।
- परीक्षा शुल्क में छूट: सूखा प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क में राहत दी जाएगी।
- रोजगार गारंटी के कामों में छूट: रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा/रोजगार गारंटी योजना के कामों के नियमों में शिथिलता दी जाएगी।
- टैंकर से पानी की व्यवस्था: जिन गांवों और बस्तियों में पीने के पानी की कमी होगी, वहां जरूरत के अनुसार टैंकर से पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
- कृषि पंपों की बिजली नहीं काटने के निर्देश: सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बकाया बिजली बिल के कारण कृषि पंपों की बिजली आपूर्ति काटने पर रोक से संबंधित राहत लागू होगी।
- खाद्यान्न की व्यवस्था: किसान और खेत मजदूर परिवारों के लिए खाद्यान्न उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था।
- पशुओं के लिए चारा: पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने और उसके नियोजन की जिम्मेदारी प्रशासन को दी गई है।
- जल संरक्षण कार्यों को गति: पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- पानी का सूक्ष्म नियोजन: ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों और पशुओं के लिए पेयजल की उपलब्धता का आवश्यकतानुसार नियोजन किया जाएगा।
आर्थिक मदद के लिए आगे आएगा अलग फैसला
सूखा घोषित होने के बाद किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल फसल नुकसान की सीधी आर्थिक सहायता को लेकर है। सरकार की ओर से बताया गया है कि नुकसान का आकलन और आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आर्थिक सहायता के संबंध में आगे निर्णय लिया जाएगा। कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे के अनुसार, सूखा घोषित होने के बाद किसानों को निर्धारित रियायतें मिलेंगी और आने वाले समय में अतिरिक्त राहत भी दी जा सकती है।
किसानों के लिए क्या बदला?
265 तालुकों में Trigger-1 लागू होने के बाद अब इन क्षेत्रों में सूखा राहत से जुड़े विभिन्न प्रावधान लागू होंगे। इसमें ऋण पुनर्गठन से लेकर पानी, बिजली, रोजगार, चारा और खाद्यान्न जैसी जरूरतों पर प्रशासन को काम करना होगा। सरकार के इस निर्णय का सीधा असर प्रभावित किसानों और ग्रामीण परिवारों पर पड़ेगा।












