महाराष्ट्र खबर24,पंढरपुर : महाराष्ट्र के सबसे बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक पर्वों में से एक आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पंढरपुर स्थित श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी की शासकीय महापूजा संपन्न की। विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित इस विशेष पूजा में मुख्यमंत्री ने राज्य की सुख-समृद्धि, किसानों की उन्नति, समाज में शांति तथा सभी नागरिकों के कल्याण की कामना की।
देवशयनी आषाढी एकादशीनिमित्त आज श्रीक्षेत्र पंढरपूर येथे भगवान श्री विठ्ठल व माता श्री रुक्मिणी यांची शासकीय महापूजा व अभिषेक करून महाराष्ट्राच्या सुख-समृद्धीसाठी, शेतकऱ्यांच्या भरभराटीसाठी आणि प्रत्येक नागरिकाच्या मंगलमय जीवनासाठी विठूमाऊलीच्या चरणी प्रार्थना केली.… pic.twitter.com/KmPLoSGQiL
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) July 25, 2026
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सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा
आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर होने वाली पंढरपुर वारी महाराष्ट्र की सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है। हर वर्ष लाखों वारकरी संत ज्ञानेश्वर महाराज, संत तुकाराम महाराज और अन्य संतों की पालखियों के साथ सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा कर भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए पंढरपुर पहुंचते हैं। भक्ति, सेवा, समानता और मानवता का संदेश देने वाली यह वारी केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती है। महापूजा के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे विधि-विधान से भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी का अभिषेक एवं पूजन किया। इसके बाद भगवान की भव्य आरती उतारी गई और मुख्यमंत्री ने श्रद्धापूर्वक भगवान के चरणों में नमन कर राज्य की जनता के सुख, समृद्धि और मंगल की प्रार्थना की।
वारकरी दंपति माने का सम्मान
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वारकरी परंपरा के सम्मान स्वरूप वारकरी दंपति बालासाहेब माने और प्रभावती माने को शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि वारकरी संप्रदाय ने सदियों से समाज को प्रेम, समानता, भाईचारे और भक्ति का संदेश दिया है। संतों की शिक्षाएं आज भी समाज को सही दिशा देने का कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंढरपुर वारी केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक विशाल जनआंदोलन है। इसमें जाति, धर्म, वर्ग और भाषा से ऊपर उठकर लाखों श्रद्धालु एक साथ भगवान विट्ठल के नाम का कीर्तन करते हुए आगे बढ़ते हैं। यही वारी की सबसे बड़ी विशेषता और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान है।
उमड़ पड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर मंदिर परिसर और पूरे पंढरपुर शहर में भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। “ज्ञानबा-तुकाराम” और “विठ्ठल-विठ्ठल” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान विट्ठल-रुक्मिणी के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे।
महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंढरपुर पहुंचे। वारकरी परंपरा की अनुशासित पदयात्रा, भजन-कीर्तन, अभंग गायन और संत परंपरा की झलक ने एक बार फिर महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।
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— श्री विठ्ठल रुक्मिणी मंदिरे समिती, पंढरपूर अधिकृत (@Vitthal_Rukmini) July 19, 2026
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