महाराष्ट्र खबर 24, लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को एक भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया। अलीगंज इलाके की एक बहुमंजिला इमारत में कथित तौर पर एसी के कंप्रेसर में विस्फोट के बाद लगी आग में 15 बच्चों और युवाओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के दौरान जान बचाने के लिए कुछ छात्रों ने इमारत से छलांग लगा दी, जिनमें से कई गंभीर रूप से घायल हो गए।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, अलीगंज स्थित तीन मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर एक पेट शॉप संचालित होती थी। पहली मंजिल पर उसी दुकान का वेयरहाउस बनाया गया था, जबकि दूसरी और तीसरी मंजिल पर 3D एनीमेशन प्रशिक्षण केंद्र और कोचिंग क्लासेस संचालित की जा रही थीं।दोपहर करीब 2:30 बजे वेयरहाउस क्षेत्र में आग लगने की सूचना मिली। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। ऊपर की मंजिलों पर मौजूद छात्र और प्रशिक्षु बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलने के कारण अंदर ही फंस गए।
15 लोगों की मौत, कई गंभीर
पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ की टीमों ने मौके पर पहुंचकर करीब दो घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया। बचाव कार्य के दौरान 15 शव बरामद किए गए, जबकि कई घायलों को ट्रॉमा सेंटर और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।
ऊपर से कूदने वाले के पेट में घुसी ग्रिल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि कई छात्र घबरा गए। धुएं और लपटों से बचने के लिए चार से पांच छात्रों ने ऊपरी मंजिलों से छलांग लगा दी। एक छात्र नीचे लगी लोहे की ग्रिल पर गिर गया, जिसकी सरिया उसके पेट में धंस गई। सभी घायलों का इलाज जारी है।
दमकल के देर से पहुंचने पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे की सूचना देने के बावजूद दमकल विभाग की टीम करीब 40 मिनट बाद मौके पर पहुंची। तब तक आग पूरी इमारत में फैल चुकी थी। इस देरी को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी गई और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
अवैध निर्माण और सुरक्षा इंतजामों की कमी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इमारत में फायर एनओसी (No Objection Certificate) नहीं थी। भवन मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था, लेकिन उसे व्यावसायिक परिसर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इमारत में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की भी व्यवस्था नहीं थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भवन में उचित अग्नि सुरक्षा उपकरण और वैकल्पिक निकास मार्ग मौजूद होते तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
मुख्यमंत्री योगी ने छोड़ी सभा
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में चल रही अपनी जनसभा छोड़कर तुरंत लखनऊ लौट आए। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज तथा मामले की जांच के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने की आर्थिक सहायता की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की।
जांच के घेरे में एलडीए और फायर विभाग
इस दर्दनाक हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और फायर विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि आवासीय मानचित्र पर बने भवन को व्यावसायिक उपयोग में बदला गया, लेकिन संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। यह हादसा एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में अवैध निर्माण, फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर समस्या को उजागर करता है।











