Nagpur News: महाराष्ट्र के नागपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। वाड़ी थाना क्षेत्र के दावलामेठी स्थित महदा कॉलोनी में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। 77 वर्षीय सेवानिवृत्त रक्षा कर्मचारी गंगाधर भोंगड़े की फिसलकर मौत हो गई, जबकि उनकी 75 वर्षीय लकवाग्रस्त पत्नी कौशल्या भोंगड़े पति की मदद के बिना कई दिनों तक भूख, प्यास और भीषण गर्मी से जूझती रहीं और आखिरकार उनकी भी मौत हो गई।
महाराष्ट्र खबर 24, नागपुर
गंगाधर भोंगड़े और कौशल्या भोंगड़े पिछले करीब चार दशक से साथ रह रहे थे। गंगाधर रक्षा विभाग से सेवानिवृत्त थे और अपनी बीमार पत्नी की पूरी जिम्मेदारी खुद संभालते थे। कौशल्या लंबे समय से लकवाग्रस्त थीं और बिस्तर से उठने में असमर्थ थीं। उनकी रोजमर्रा की हर जरूरत के लिए वे पूरी तरह अपने पति पर निर्भर थीं। दंपति की कोई संतान नहीं थी, लेकिन गंगाधर ने कौशल्या की पहली शादी से हुए चार बच्चों को अपनाया था। समय के साथ परिवार बिखरता चला गया। बड़ा बेटा वर्षों पहले घर छोड़कर चला गया था, जबकि छोटे बेटे का निधन हो चुका था। बड़ी बेटी ही समय-समय पर उनकी देखभाल करती थी।
बेटी को किया था आखिरी फोन
पुलिस के अनुसार, 23 मई को गंगाधर भोंगड़े ने अपनी बड़ी बेटी को फोन कर तबीयत खराब होने की जानकारी दी थी। उन्होंने अस्पताल जाने की इच्छा जताई थी और पत्नी की देखभाल के लिए किसी की व्यवस्था करने को कहा था। बेटी ने जल्द आने का आश्वासन दिया, लेकिन उससे पहले ही यह दुखद हादसा हो गया।
बदबू आने पर हुआ खुलासा
29 मई को पड़ोसियों ने घर से तेज दुर्गंध आने पर शक जताया। उन्होंने तुरंत परिवार के सदस्यों को सूचना दी। जब दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए।रसोई में गंगाधर भोंगड़े का शव पड़ा था, जबकि बेडरूम में कौशल्या भोंगड़े मृत अवस्था में बिस्तर पर मिलीं। दोनों शव कई दिन पुराने थे।
कैसे हुई दोनों की मौत?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गंगाधर रसोई में काम करते समय फिसलकर गिर गए थे। गिरने से उन्हें गंभीर चोट लगी और वे उठ नहीं सके। कुछ ही समय बाद उनकी मौत हो गई।दूसरी ओर, बिस्तर पर पड़ी कौशल्या पति की सहायता के बिना न तो पानी पी सकीं और न ही भोजन तक पहुंच सकीं। नागपुर में पड़ रही भीषण गर्मी, डिहाइड्रेशन और भुखमरी के कारण कुछ दिनों बाद उनकी भी मौत हो गई।
अखबारों से मिला सुराग
घर के बाहर 27, 28 और 29 मई के अखबार पड़े मिले, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि हादसा 26 मई के आसपास हुआ होगा। पुलिस का मानना है कि गंगाधर की मौत पहले हुई, जबकि कौशल्या कुछ दिन तक जीवित रहीं और फिर उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
पुलिस जांच में क्या मिला?
वाड़ी पुलिस ने मौके पर फॉरेंसिक टीम और स्निफर डॉग्स को बुलाया। जांच में चोरी, लूटपाट या किसी आपराधिक गतिविधि के कोई संकेत नहीं मिले। पुलिस ने इसे एक दुखद और प्राकृतिक परिस्थितियों में हुई मौत माना है। दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
समाज के लिए बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि अकेले रह रहे बुजुर्गों की सुरक्षा और देखभाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। परिवार से दूर रह रहे वरिष्ठ नागरिकों के लिए नियमित संपर्क, मेडिकल सहायता और सामाजिक सहयोग कितना जरूरी है, यह घटना उसकी दर्दनाक याद दिलाती है।
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