महाराष्ट्र खबर24,नागपुर
भारत में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या 18 साल की बेटी अपनी मर्जी से शादी कर सकती है। कई परिवारों में इस विषय को लेकर भ्रम बना रहता है। यदि आपकी बेटी 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी है, तो भारतीय कानून के अनुसार वह बालिग मानी जाती है और कुछ शर्तों के साथ शादी कर सकती है।
भारत में लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र क्या है?
वर्तमान कानून के अनुसार भारत में :
1.लड़कियों की शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र : 18 वर्ष
2.लड़कों की शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र : 21 वर्ष
इसका मतलब है कि यदि लड़की 18 साल की हो चुकी है और लड़का 21 साल का है, तो दोनों कानूनी रूप से विवाह कर सकते हैं।
क्या 18 साल की लड़की अपनी मर्जी से शादी कर सकती है?
हाँ। 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद लड़की बालिग मानी जाती है। वह अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं ले सकती है।
अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह कर सकती है।शादी के लिए माता-पिता की अनुमति के बिना भी विवाह कर सकती है।
हालांकि, विवाह दोनों पक्षों की स्वेच्छा से होना चाहिए और किसी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए।
क्या माता-पिता की अनुमति जरूरी है?
कानूनी रूप से 18 वर्ष की बालिग लड़की को शादी के लिए माता-पिता की अनुमति लेना आवश्यक नहीं है। यदि लड़की अपनी इच्छा से शादी करना चाहती है, तो कानून उसके निर्णय का सम्मान करता है।
क्या लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल कर दी गई है?
महिलाओं की शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष करने का प्रस्ताव सरकार द्वारा रखा गया था, लेकिन मई 2026 तक यह कानून लागू नहीं हुआ है। वर्तमान में लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र अभी भी 18 वर्ष ही है।
शादी के लिए जरूरी दस्तावेज
यदि कोई बालिग लड़की विवाह करना चाहती है, तो सामान्यतः निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
1.आधार कार्ड
2.जन्म प्रमाणपत्र या 10वीं की मार्कशीट
3.पासपोर्ट साइज फोटो
4.निवास प्रमाण पत्र
निष्कर्ष
यदि आपकी बेटी 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी है, तो वह भारत के कानून के अनुसार अपनी इच्छा से शादी कर सकती है। माता-पिता की अनुमति कानूनी रूप से आवश्यक नहीं है, लेकिन परिवार की सहमति और समझदारी से लिया गया निर्णय हमेशा बेहतर माना जाता है.
शादी की उम्र में बदलाव की योजना
सरकार बेटियों की शादी की उम्र में बदलाव करने की योजना बना रही है। शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। कपल बहुत परेशान हैं। इस बारे में सही जानकारी न होने की वजह से कई शादियां रोक दी गईं हैं या टाल दी गईं हैं।
क्यों पड़ी जरूरत
दरअसल मामला उस समय शुरू हुआ जब 15 अगस्त 2021 को पीएम मोदी ने लाल किले से राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था कि लड़कियों को कुपोषण से बचाने जरूरी है कि उनकी शादी उचित समय पर हो। इसके लिए एक कमेटी बनाई जाएगी जो इस बारे में सही फैसला लेगी। कुछ समय बाद सांसद जया जेटली की अगुआई में एक 10 सदस्यीय कमेटी बनाई गई। जिसे टास्क फोर्स नाम दिया गया। दिसंबर 2021 को टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट दी। जिसमें कहा गया था कि लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल ही होनी चाहिए। फोर्स का तर्क था कि बेटियों के विवाह में देरी का परिवार, महिला और बच्चों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट में वकील अश्विनी उपाध्याय ने एक याचिका दायर कर दी जिसमें कहा गया कि लड़का और लड़की के बीच विवाह की उम्र का कानूनी अंतर खत्म किया जाए। रिट पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा। केंद्र ने बताया कि इस मामले पर हमने टास्क फोर्स का गठन किया है जो जल्द ही हमें रिपोर्ट देगा। बस यहीं से मुद्दा गरमाने लगा।
ये है नया बिल
बाल विवाह निषेध संशोधन बिल, 2021 में लड़की की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रस्ताव है। ये प्रावधान देश के सभी समुदायों के विवाह संबंधी कानूनों पर लागू होगा, जिसके बाद देश में मौजूद तमाम विवाह कानूनों में संशोधन करना पड़ेगा। अब सरकार बाल विवाह निषेध कानून, स्पेशल मैरिज एक्ट और हिंदू मैरिज एक्ट में संशोधन करेगी। नीति आयोग में जया जेटली की अध्यक्षता में बने टास्क फोर्स ने इसकी सिफारिश की थी।
फिलहाल अधर में है बिल
आखिरकार कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। बात संसद तक पहुंची। केंद्रीय मंत्री ईरानी ने लोकसभा में बाल विवाह निषेध संशोधन बिल, 2021 को पेश किया। इस पर विपक्ष ने बहुत हंगामा किया। बिल का जमकर विरोध करते हुए विपक्ष ने एक सुर में मांग की कि इसे स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) के पास भेज देना चाहिए। स्टैंडिंग कमेटी में बिल का जाने का मतलब ये है कि बिल पर अब सभी दल अपनी-अपनी राय देंगे। इसके बाद ही ये बिल कानून की शक्ल ले पाएगा। यानी फिलहाल बिल अधर में है।
क्या है बाल विवाह निषेध अधिनियम
कानून के मुताबिक अभी शादी करने के लिए लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष है। इसमें धर्म के हिसाब से कोई बदलाव या छूट नहीं दी गई है। फिलहाल बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू है। जिसके मुताबिक़ 21 और 18 से पहले की शादी को बाल विवाह माना जाएगा। ऐसा करने और करवाने पर 2 साल की जेल और एक लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
इस उम्र की महिला सहमति से संबंध बनाए तो क्या?
यदि कोई महिला 18 वर्ष की होने पर और शादी की उम्र (प्रस्तावित 21 वर्ष) से पहले ही अपनी सहमति से संबंध बनाती है तो वह इसके लिए स्वतंत्र है। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में लता सिंह vs स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश मामले में फैसला देते हुए कहा था कि, ”अगर कोई महिला बालिग है, तो वह अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति से शादी करने या अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति के साथ रहने के लिए स्वतंत्र है।”सर्वोच्च न्यायालय ने ये भी कहा है कि दो बालिग लोग, जो 18 या उससे अधिक के हों, अपनी सहमति से ‘लिव-इन पार्टनर’ के रूप में एक साथ रह सकते हैं, भले ही वे शादीशुदा न हों।









