फुटस्टेप पावर जनरेशन टेक्नोलॉजी से स्ट्रीट लाइट और ट्रैफिक सिस्टम चलाने का दावा
नागपुर | महाराष्ट्र खबर
अगर कोई कहे कि सिर्फ पैदल चलने से बिजली पैदा हो सकती है, तो यह सुनने में अजीब जरूर लगेगा। लेकिन नागपुर के इंजीनियरिंग छात्रों ने इसे हकीकत में बदलने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है।छात्रों ने “फुटस्टेप पावर जनरेशन टेक्नोलॉजी” विकसित की है, जिसमें लोगों के चलने, दौड़ने या टहलने से उत्पन्न ऊर्जा को बिजली में बदला जा सकता है। इस तकनीक का उपयोग स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक सिग्नल, खेतों में छोटे उपकरण और मोबाइल चार्जिंग जैसे कार्यों में किया जा सकता है।रिसर्च से जुड़े छात्र सोम्यजीत के अनुसार, इस तकनीक के व्यापक उपयोग से बिजली की बचत के साथ-साथ ऊर्जा संकट को कम करने में मदद मिल सकती है।
⚡ कितनी बनेगी बिजली?
रिसर्च के मुताबिक, करीब 160 कदम चलने से सीमित मात्रा में बिजली उत्पन्न की जा सकती है, जिसका उपयोग छोटे उपकरणों को चलाने या बैटरी चार्ज करने में किया जा सकता है। हालांकि, यह तकनीक बड़े स्तर पर बिजली उत्पादन के बजाय सपोर्ट सिस्टम के रूप में ज्यादा उपयोगी मानी जा रही है।

क्यों है खास?
1. रिन्यूएबल एनर्जी का नया तरीका.
2.भीड़भाड़ वाले इलाकों में ज्यादा असरदार.
3.पर्यावरण के लिए सुरक्षित.
4.बिजली बचत में मददगार.
🔍 निष्कर्ष
फुटस्टेप पावर जनरेशन तकनीक भविष्य में स्मार्ट सिटी और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, अभी इसे बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले और परीक्षण की जरूरत है।









