महाराष्ट्र में डेयरी उत्पादों में मिलावट को रोकने के लिए सरकार ने तकनीकी कदम उठाने की दिशा में पहल की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए हैं।
maharashtrakhabar24in,मुंबई: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड और IIT को निर्देश दिए हैं कि वे मिलकर एक ऐसा स्मार्ट सिस्टम तैयार करें, जो दूध में मिलावट को तुरंत पकड़ सके। दरअसल, अभी राज्य में केवल 40 प्रतिशत दूध ही ऑर्गनाइज्ड सेक्टर के जरिए प्रोसेस होता है, जबकि बाकी दूध अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर से आता है, जहां मिलावट के मामले ज्यादा सामने आते हैं।इसी को देखते हुए सरकार अब ज्यादा से ज्यादा गांवों और प्रोड्यूसर्स को कोऑपरेटिव डेयरी सिस्टम से जोड़ने पर जोर दे रही है। देशभर में 75 हजार नए गांवों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा, एक खास टेस्ट स्ट्रिप भी तैयार की गई है, जो दूध में यूरिया और अन्य मिलावट का पता लगा सकती है। यह सिस्टम अगले 6 महीनों में पूरी तरह लागू होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र में दूध में मिलावट रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। CM फडणवीस ने AI आधारित सिस्टम बनाने के निर्देश दिए हैं। जानिए कैसे काम करेगा ये नया सिस्टम।
NDDB और IIT मिलकर बनाएंगे AI सिस्टम
NDDB के चेयरमैन मीनेश शाह ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राज्य में चल रहे डेयरी प्रोजेक्ट्स की जानकारी दी। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि दूध में मिलावट की पहचान के लिए AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक सटीक और तेज हो सके।
अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में मिलावट की चुनौती
वर्तमान में राज्य में लगभग 40% दूध ही ऑर्गनाइज्ड सेक्टर के माध्यम से प्रोसेस होता है, जबकि शेष हिस्सा अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर से आता है। इसी कारण मिलावट की घटनाएं अधिक सामने आती हैं। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक गांवों और उत्पादकों को संगठित डेयरी प्रणाली से जोड़ना है।
75,000 गांवों को जोड़ने का लक्ष्य
सरकार ने देशभर में 75,000 नए गांवों को कोऑपरेटिव डेयरी सिस्टम से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण भी बेहतर होगा।
टेस्ट स्ट्रिप से होगी तुरंत जांच
दूध में मिलावट की पहचान के लिए एक विशेष टेस्ट स्ट्रिप भी विकसित की गई है। यह स्ट्रिप यूरिया और अन्य मिलावटों का पता लगाने में सक्षम होगी। सरकार के अनुसार, यह प्रणाली अगले छह महीनों में पूरी तरह लागू हो सकती है।AI आधारित तकनीक और टेस्टिंग सिस्टम के जरिए महाराष्ट्र में दूध की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित उत्पाद मिलने के साथ किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।









