Oscar 2027: मराठी सिनेमा के लिए बड़ी खबर सामने आई है। संतोष दावखर के निर्देशन में बनी मराठी साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म ‘गोंधल’ को 99वें अकैडमी अवॉर्ड्स यानी ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। ‘गोंधल’ को बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में भारत की ओर से भेजा जाएगा।
33 फिल्मों में से ‘गोंधल’ का चयन
Oscar 2027 के लिए भारत की ओर से कुल 33 फिल्मों को विचार के लिए प्रस्तुत किया गया था। इनमें अलग-अलग भारतीय भाषाओं की फिल्में शामिल थीं। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की चयन समिति ने इन फिल्मों में से संतोष दावखर की ‘गोंधल’ को भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना। चयन समिति के अध्यक्ष फिल्ममेकर पी. शेषाद्रि थे। यह उपलब्धि मराठी सिनेमा के लिए भी खास है, क्योंकि ‘गोंधल’ महाराष्ट्र की ग्रामीण पृष्ठभूमि, लोक परंपराओं और सामाजिक रिश्तों को एक थ्रिलर कहानी के साथ जोड़ती है। फिल्म इससे पहले फिल्म फेस्टिवल सर्किट में भी पहचान बना चुकी है। संतोष दावखर को 2025 के 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में निर्देशन के लिए सिल्वर पीकॉक से सम्मानित किया गया था।
क्या है ‘गोंधल’ की कहानी?
‘गोंधल’ की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि में बुनी गई है। फिल्म की मुख्य कहानी सुमन नाम की महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी शादी आनंदराव से होने वाली है। सुमन का अतीत हालांकि उसका पीछा नहीं छोड़ता। सुमन का कभी सरजेराव के साथ प्रेम संबंध था। सरजेराव गांव के प्रभावशाली पाटिल का बेटा है। दोनों एक-दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों ने उनके रिश्ते को अलग कर दिया। सुमन को आनंदराव से शादी के लिए मजबूर होना पड़ा। कहानी में दहेज की मांग और सामाजिक दबाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आनंदराव स्वभाव से सीधे और सरल व्यक्ति हैं। दूसरी ओर, सरजेराव सुमन को दोबारा हासिल करने की कोशिश करता है। यहीं से रिश्तों, पुराने प्रेम, सामाजिक दबाव और भावनात्मक उलझनों की कहानी धीरे-धीरे साइकोलॉजिकल थ्रिलर का रूप लेने लगती है।
एक रात और ‘गोंधल’ की रहस्यमयी रस्म
फिल्म की कहानी का बड़ा हिस्सा एक खास रात के दौरान सामने आता है। नवविवाहित जोड़े के जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए महाराष्ट्र की पारंपरिक ‘गोंधल’ लोक रस्म का आयोजन किया जाता है।रात के अंधेरे में जलती आग, ढोल की आवाज, धार्मिक मंत्र और लोक परंपराओं के बीच गांव के लोग इस अनुष्ठान के लिए इकट्ठा होते हैं। लेकिन यह रात सिर्फ एक धार्मिक रस्म तक सीमित नहीं रहती। धीरे-धीरे रिश्तों के छिपे हुए पहलू और पुराने राज सामने आने लगते हैं।फिल्म की खासियत यही है कि इसमें महाराष्ट्र की लोक संस्कृति और परंपरा को सिर्फ पृष्ठभूमि के तौर पर नहीं, बल्कि कहानी के अहम हिस्से के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
मराठी सिनेमा के लिए बड़ी उपलब्धि
‘गोंधल’ के ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री बनने के बाद मराठी सिनेमा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में है। फिल्म में इशिता देशमुख, योगेश सोहोनी, किशोर कदम, सुरेश विश्वकर्मा, निशाद भोइर और अनुज प्रभु सहित कई कलाकार नजर आते हैं।हालांकि भारत की आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद भी ‘गोंधल’ का ऑस्कर सफर अभी आगे बाकी है। अब फिल्म 99वें अकैडमी अवॉर्ड्स की प्रक्रिया में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी और आगे की चयन प्रक्रिया में हिस्सा लेगी।इस तरह महाराष्ट्र की ग्रामीण मिट्टी, लोक परंपरा और एक रहस्यमयी रात की कहानी लेकर बनी ‘गोंधल’ अब दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कारों में से एक के मंच तक पहुंच गई है।










