Marathwada Drought 2026: मराठवाड़ा में सूखे जैसे हालात के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले तीन दिनों में सूखे की पहली अधिसूचना जारी की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार संकट की इस घड़ी में किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें राहत देने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।फडणवीस बुधवार को लातूर, धाराशिव और सोलापुर के दौरे पर हैं। लातूर जिले के जाऊ गांव पहुंचकर उन्होंने सूखे की स्थिति, फसलों और पानी की उपलब्धता का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने किसानों से बातचीत की। किसानों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी परेशानियां रखीं तो कई किसान भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
Marathwada Drought 2026 रबी फसल के लिए हर संभव मदद का भरोसा
मुख्यमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि रबी सीजन के लिए जो भी संभव मदद होगी, सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को संकट से बाहर निकालने के लिए सरकार हर संभव प्रयास करेगी।सरकार ने सूखे जैसी स्थिति का आकलन करने के लिए प्रशासन को फसल और पानी की स्थिति की जांच करने तथा पंचनामे शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को लगातार फील्ड विजिट कर जमीनी स्थिति की रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है।
3 दिन में सूखे की पहली अधिसूचना
मराठवाड़ा में बारिश की कमी और जल संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार ने सूखे की स्थिति को गंभीरता से लिया है। अगले तीन दिनों में सूखे की पहली अधिसूचना जारी की जाएगी।उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है और मराठवाड़ा को सूखे की समस्या से स्थायी रूप से बाहर निकालने के लिए भी योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
मराठवाड़ा में 35 फीसदी बारिश की कमी
मराठवाड़ा में इस साल औसत के मुकाबले करीब 35 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा कमी लातूर में करीब 50 फीसदी बताई गई है। धाराशिव और बीड में लगभग 40 फीसदी, जबकि परभणी में करीब 43 फीसदी बारिश की कमी है।छत्रपति संभाजीनगर और जालना में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, लेकिन यहां भी करीब 26 फीसदी कमी दर्ज की गई है।
917 जल परियोजनाओं में पानी की कमी
मराठवाड़ा में बड़े, मध्यम और छोटे बांधों के साथ नदी पर बने कुल 917 जल प्रकल्प हैं। प्रशासन के मुताबिक इन परियोजनाओं में अपेक्षित जल भंडारण की तुलना में करीब 50 फीसदी की कमी है।जायकवाड़ी बांध में कुछ पानी उपलब्ध है, लेकिन दूसरे प्रमुख बांधों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। मांजरा बांध में भी जल भंडारण काफी कम रह गया है।बारिश की कमी का असर पेयजल व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। मराठवाड़ा में अभी भी बड़ी संख्या में टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है।
बाढ़ का पानी मराठवाड़ा लाने की योजना
दूसरी बड़ी घोषणा करते हुए फडणवीस ने मराठवाड़ा के स्थायी जल संकट को दूर करने की योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोल्हापुर और सांगली के बाढ़ के अतिरिक्त पानी को उजनी बांध में लाने और वहां से मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों तक पहुंचाने की परियोजना पर काम किया जा रहा है।मुख्यमंत्री के मुताबिक इस परियोजना को विश्व बैंक की मंजूरी और फंडिंग भी मिली है। इसके अलावा मराठवाड़ा को स्थायी रूप से सूखा मुक्त करने के लिए एक बड़े प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू है। इसका विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR दिसंबर तक आने की उम्मीद है।
अधिकारियों को फील्ड विजिट के निर्देश
दुष्काल जैसी स्थिति का आकलन करने के लिए जिलाधिकारियों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, तहसीलदारों, गट विकास अधिकारियों और कृषि विभाग के अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड विजिट करने के निर्देश दिए गए हैं।अधिकारी फसलों की स्थिति, पानी की उपलब्धता और सूखे की गंभीरता का आकलन करेंगे। इसके आधार पर प्राथमिक रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी और आगे राहत एवं सहायता को लेकर फैसला लिया जाएगा।
6 माह में 465 किसानों कर चुके हैं आत्महत्या
जनवरी से जून 2026 के बीच क्षेत्र में 465 किसानों ने आत्महत्या की है।इनमें सबसे अधिक 109 मामले छत्रपति संभाजीनगर जिले के हैं, जबकि बीड में 95 और धाराशिव में 65 किसानों ने जान दी। इन आंकड़ों को लेकर एआईएमआईएम के प्रदेशाध्यक्ष तथा पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने राज्य सरकार पर निशाना साधा था।










