Maharashtra Act :लीगल डेस्क, महाराष्ट्र खबर 24, नागपुर : महाराष्ट्र में फ्लैट खरीदने के बाद कई लोगों को एक समस्या का सामना करना पड़ता है-बिल्डिंग में फ्लैट बिक जाते हैं, लोग रहने भी लगते हैं, लेकिन हाउसिंग सोसायटी के गठन और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती। ऐसे में फ्लैट मालिकों को यह जानना जरूरी है कि सोसायटी के गठन की जिम्मेदारी क्या है और बिल्डर सहयोग नहीं करे तो आगे की प्रक्रिया कैसे शुरू की जा सकती है।महाराष्ट्र में सहकारी हाउसिंग सोसायटी का रजिस्ट्रेशन Maharashtra Co-operative Societies Act, 1960 के तहत होता है। राज्य के सहकार विभाग के अनुसार, प्रस्तावित सोसायटी के सदस्य या चीफ प्रमोटर निर्धारित दस्तावेजों के साथ रजिस्ट्रार के पास आवेदन कर सकते हैं।
बिल्डर सोसायटी बनाने में देरी करे तो क्या करें?
Maharashtra Act:सबसे पहले फ्लैट मालिकों को मिलकर सोसायटी गठन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इसके लिए प्रमोटर/चीफ प्रमोटर के माध्यम से संबंधित सहकारी संस्था रजिस्ट्रार कार्यालय में आवेदन किया जाता है।सरकारी प्रक्रिया के अनुसार आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज जमा किए जाते हैं। संबंधित कार्यालय दस्तावेजों की जांच करता है और आवश्यक होने पर आपत्तियों की प्रक्रिया भी अपनाई जाती है। दस्तावेज सही पाए जाने पर रजिस्ट्रार सोसायटी का रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी करता है।
RERA :कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हो सकते हैं?
फ्लैट मालिकों को अपने पास इन दस्तावेजों की प्रतियां सुरक्षित रखनी चाहिए-
- फ्लैट का Registered Agreement
- सदस्यों की सूची
- बिल्डिंग और जमीन से जुड़े उपलब्ध दस्तावेज
- मंजूर बिल्डिंग प्लान
- Completion/Occupancy Certificate, जहां लागू हो
- Development Agreement की प्रति, यदि उपलब्ध हो
- जमीन से संबंधित रिकॉर्ड
- बिल्डर/डेवलपर के साथ हुई पत्राचार की प्रतियां
सटीक दस्तावेजों की सूची प्रोजेक्ट और लागू प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय की वर्तमान आवश्यकताओं की जांच करना जरूरी है।
रजिस्ट्रार के पास शिकायत या आवेदन कैसे करें?
अगर बिल्डर सहयोग नहीं कर रहा है, तो फ्लैट मालिक केवल बिल्डर के जवाब का इंतजार करने के बजाय संबंधित सहकारी संस्था के रजिस्ट्रार कार्यालय से प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं। महाराष्ट्र सहकार विभाग के अनुसार सोसायटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में नाम आरक्षण, आवेदन, दस्तावेजों की जांच और रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी करने जैसे चरण शामिल हैं।एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि सहकार विभाग की जानकारी के अनुसार, रजिस्ट्रेशन आवेदन प्राप्त होने के बाद यदि संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय दो महीने तक कोई कार्रवाई नहीं करता, तो कानून में Deemed Registration का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, किसी वास्तविक मामले में इसका लाभ लेने से पहले मौजूदा कानून और संबंधित कार्यालय की प्रक्रिया की पुष्टि करना जरूरी है।
RERA के तहत भी फ्लैट मालिकों के अधिकार
नई परियोजनाओं में फ्लैट खरीदारों को MahaRERA के नियमों की भी जानकारी रखनी चाहिए। RERA के तहत प्रमोटर की जिम्मेदारियों में अलॉटीज की Association/Society बनाने की प्रक्रिया से जुड़े प्रावधान हैं। इसलिए बिल्डर द्वारा सोसायटी गठन में देरी होने पर प्रोजेक्ट के RERA दस्तावेज और संबंधित समयसीमा की जांच करना उपयोगी है।फ्लैट मालिक MahaRERA के रिकॉर्ड में अपने प्रोजेक्ट की जानकारी देखकर यह भी जांच सकते हैं कि परियोजना किस चरण में है और प्रमोटर ने सोसायटी/Association से संबंधित क्या जानकारी दी है।

सोसायटी बनने के बाद एक और जरूरी काम
सिर्फ सोसायटी का रजिस्ट्रेशन होना ही अंतिम चरण नहीं है। जमीन और बिल्डिंग का Conveyance सोसायटी के नाम होना भी महत्वपूर्ण है।महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, Conveyance वह प्रक्रिया है जिसके जरिए जमीन और बिल्डिंग का स्वामित्व हाउसिंग सोसायटी के नाम ट्रांसफर किया जाता है। अगर प्रमोटर/बिल्डर Conveyance नहीं करता, तो महाराष्ट्र में Deemed Conveyance की कानूनी व्यवस्था उपलब्ध है। सरकार ने इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी शुरू की है।
फ्लैट मालिकों को क्या करना चाहिए?
अगर आपकी बिल्डिंग में सोसायटी अभी तक रजिस्टर नहीं हुई है, तो सबसे पहले सभी फ्लैट मालिकों को मिलकर दस्तावेज इकट्ठा करने चाहिए। इसके बाद संबंधित सहकारी संस्था रजिस्ट्रार कार्यालय में उपलब्ध वर्तमान प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी लेकर आवेदन की तैयारी करनी चाहिए।किसी विवाद या कानूनी नोटिस की स्थिति में संबंधित कानून के विशेषज्ञ से सलाह लेना भी उचित है।

Maharashtra Act : बड़ी बात
फ्लैट खरीदने के बाद सोसायटी का रजिस्ट्रेशन केवल बिल्डर की सुविधा का विषय नहीं है। फ्लैट मालिकों को अपने प्रोजेक्ट के दस्तावेज, सोसायटी गठन की स्थिति और जमीन-बिल्डिंग के Conveyance की जानकारी खुद भी रखनी चाहिए। महाराष्ट्र में इसके लिए Maharashtra Co-operative Societies Act, MOFA और RERA से जुड़े प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। सरकारी सहकार विभाग की वेबसाइट पर सोसायटी रजिस्ट्रेशन, मॉडल बायलॉज और Deemed Conveyance से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।









