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Sukhe ki Maar: गेंदा की बंपर पैदावार, पर किसानों को नहीं मिल रहे सही दाम

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Sukhe ki Maar: छत्रपति संभाजीनगर: मराठवाड़ा में सूखे के कारण सोयाबीन, कपास, मूंग समेत कई खरीफ फसलें बर्बाद हो गई हैं। वहीं, इस बार फूलों की खेती करने वाले किसानों को अच्छी पैदावार मिली है। कम बारिश के चलते फूलों के खराब होने में कमी आई है और गेंदे का उत्पादन बढ़कर 15 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच गया। हालांकि, फूलों की बंपर पैदावार के बावजूद किसानों को अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा है। दशहरे के अवसर पर फूलों की मांग बढ़ने के बावजूद थोक बाजार में गेंदा 10 से 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

Sukhe ki Maar : आधे हुए फूलों के दाम

इस साल कम बारिश के कारण गुलाब, गेंदा और शेवंती के फूलों की पैदावार अच्छी हुई है। किसानों के मुताबिक, बारिश कम होने से फूलों को नुकसान कम हुआ, जिससे उत्पादन में बढ़ोतरी हुई। लेकिन बाजार में अधिक आवक होने के कारण फूलों के दाम पिछले साल की तुलना में लगभग आधे रह गए हैं। थोक बाजार में गेंदा 10 से 30 रुपये प्रति किलो, निशिगंधा करीब 100 रुपये प्रति किलो, गुलाब 150 रुपये प्रति किलो और शेवंती लगभग 80 रुपये प्रति किलो बिक रही है। पिछले साल इन फूलों के दाम इससे लगभग दोगुने थे। ऐसे में अच्छी पैदावार के बावजूद किसानों की आमदनी पर दबाव बना हुआ है।

दशहरे पर फूलों की मांग बढ़ी, खुदरा बाजार में महंगे दाम

दशहरे के त्योहार के दौरान पूजा, सजावट और धार्मिक आयोजनों के लिए फूलों की मांग बढ़ जाती है। इसके चलते खुदरा बाजार में गेंदे के फूल 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं। दूसरी ओर, किसानों को थोक बाजार में कम कीमत मिलने से उन्हें इस बढ़ी हुई मांग का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। फूल बाजार के व्यापारी समाधान विखे के अनुसार, इस साल उनके पास 50 से 60 क्विंटल गेंदा और करीब 10 क्विंटल गुलाब के फूल थे। उनके मुताबिक, गेंदे का भाव 10 से 30 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि गुलाब की कीमत 250 से 300 रुपये प्रति किलो तक रही। उन्होंने बताया कि नई गाड़ी खरीदने वाले ग्राहक भी गेंदे की तुलना में गुलाब को अधिक पसंद करते हैं।

 किसान खाली हाथ

सूखे का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। आमतौर पर दशहरे तक मूंग, कपास और सोयाबीन जैसी फसलें बाजार में पहुंचने लगती हैं। इन फसलों से मिलने वाली रकम से किसान त्योहार के दौरान किराना, कपड़े और अन्य जरूरी सामान खरीदते हैं। लेकिन इस साल फसलों के खराब होने से किसानों की आमदनी प्रभावित हुई है। किसानों के हाथ में पैसा नहीं होने के कारण त्योहार के दौरान बाजार में खरीदारी कम हो गई है। इससे व्यापारियों को भी कारोबार में सुस्ती का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों को सरकारी मदद नाकाफी

फूल किसान और विक्रेता राजू बागड़े का कहना है कि सरकार ने किसानों की मदद के लिए केवल 5,000 रुपये देने की घोषणा की है, जबकि सूखे से हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह सहायता पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक, किसानों के पास पैसा नहीं होने और बाजार में खरीदारी घटने से लेन-देन प्रभावित हुआ है। कुल मिलाकर, इस साल कम बारिश के कारण फूलों की पैदावार बढ़ने के बावजूद किसानों को आर्थिक राहत नहीं मिल पाई है। एक ओर दशहरे पर फूलों की मांग बढ़ रही है, तो दूसरी ओर थोक और खुदरा कीमतों के बीच बड़ा अंतर किसानों की कमाई पर सवाल खड़े कर रहा है। वहीं, खरीफ फसलों की बर्बादी के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और त्योहारों के बाजार पर भी सूखे की मार साफ दिखाई दे रही है।

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