maharashtrakhabar24.नागपुर. सेंट्रल इंडिया कॉलेज ऑफ लॉ की प्राचार्य डॉ. पल्लवी भावे के असामयिक निधन से शिक्षण एवं विधि क्षेत्र में शोक की लहर है। उनके व्यक्तित्व और जीवन यात्रा को याद करते हुए उनकी बचपन की सहेली जया पाधवल ने एक भावुक श्रद्धांजलि लिखी है, जिसने सभी को भावविभोर कर दिया।
मित्रता को याद कर भावुक हुईं जया
जया पाधवल ने अपनी श्रद्धांजलि में बताया कि 1980 के दशक में चंद्रपुर जिले के वणी में दोनों पड़ोसी थीं। उस समय की यादों को साझा करते हुए उन्होंने डॉ. पल्लवी को “रानी” कहकर संबोधित किया और कहा कि वे हर क्षेत्र में निपुण थीं। पढ़ाई, सिलाई, रंगोली, अभिनय, लेखन और अन्य गतिविधियों में उनकी प्रतिभा अद्भुत थी। उन्होंने एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि एक कार्यक्रम के लिए पल्लवी ने खुद रात भर जागकर सफेद फ्रॉक तैयार की और सुबह उसे पहनकर अपनी सहेली से राय मांगी। इसी तरह बचपन की छोटी-छोटी घटनाएं—जैसे खाना बनाते समय गलती होने पर उसे पूरा खत्म करना-उनके दृढ़ निश्चय और संवेदनशील स्वभाव को दर्शाती हैं। जया ने बताया कि पल्लवी को बचपन से ही पुरस्कार जीतने का शौक था और वे हर प्रतियोगिता में अव्वल रहती थीं। मंदिर में पूजा-अर्चना, श्लोक पाठ, और साथ बिताए गए सरल पलों की यादें आज भी उनके दिल में जीवित हैं।
एक सफल एडवोकेट भी थीं पल्लवी
नागपुर आने के बाद डॉ. पल्लवी भावे ने विधि क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। वे एक सफल वकील और प्रेरणादायक शिक्षिका के रूप में जानी जाती थीं, जिन्होंने अनेक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। हालांकि, उनके असामयिक निधन ने परिवार और मित्रों को गहरे सदमे में डाल दिया है। जया पाधवल ने अपनी श्रद्धांजलि में भावुक होकर उनके परिवार—माता, भाई, पति नितिन और पुत्र शांतनु—का जिक्र करते हुए कहा कि उनके जाने से सभी के जीवन में एक अपूरणीय शून्य पैदा हो गया है। उन्होंने अंत में अफसोस जताया कि हाल ही में मिले निमंत्रण के बावजूद वे उनसे मिल नहीं पाईं, जो अब जीवनभर की कसक बन गई है। डॉ. पल्लवी भावे को उनके योगदान, व्यक्तित्व और स्नेहपूर्ण स्वभाव के लिए हमेशा याद किया जाएगा।










