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भारत का सबसे अनोखा मंदिर, जहां पूजे जाते हैं कॉकरोच, शरीर पर गिर जाए कॉकरोच तो खुल जाती है किस्मत?

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महाराष्ट्र खबर 24,छत्रपति संभाजीनगर.

एक ओर जहां शहर के दीपक ने अमेरिका में बैठे-बैठे कॉकरोच पार्टी बना डाली वहीं कल यानी शनिवार को कॉकरोच पार्टी दिल्ली के जंतक-मंतर पर धरना देने वाली है। “कॉकरोच” शब्द को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा देखने को मिल रही है। इसी चर्चा के बीच महाराष्ट्र के एक ऐसे अनोखे मंदिर की ओर लोगों का ध्यान गया, जहां तिलचट्टों (कॉकरोच) को देवतुल्य सम्मान दिया जाता है। इतना ही नहीं, इनके पीछे एक धार्मिक मान्यता और पौराणिक कथा भी प्रचलित है।

300 साल पुराना है यह अनोखा मंदिर

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के परली शहर में स्थित “झुरले गोपीनाथ मंदिर” अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि यहां करीब 300 वर्षों से कॉकरोचों को देवस्वरूप मानकर सम्मान दिया जा रहा है। बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल वैद्यनाथ मंदिर के नजदीक स्थित इस मंदिर में हजारों की संख्या में कॉकरोच घूमते दिखाई देते हैं।यहां उन्हें कीट या गंदगी का प्रतीक नहीं माना जाता, बल्कि भगवान का रूप समझा जाता है।

कॉकरोचों को यहां शुभ माना जाता है

जहां आमतौर पर घर में तिलचट्टा दिखाई देने पर लोग उसे भगाने या मारने की कोशिश करते हैं, वहीं इस मंदिर में दृश्य बिल्कुल अलग है। मंदिर के गर्भगृह, मूर्ति के आसपास और दीवारों पर पूरे वर्ष कॉकरोचों का वास रहता है। स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि ये कॉकरोच किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते। यहां तक कि यदि किसी श्रद्धालु के शरीर पर कॉकरोच गिर जाए, तो उसे शुभ और सौभाग्य का संकेत माना जाता है।

क्या है झुरले गोपीनाथ मंदिर की कथा?

मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार गणेशपार क्षेत्र के बडवे परिवार के एक सदस्य को स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण ने दर्शन देकर एक विशेष स्थान पर मूर्ति होने की जानकारी दी। जब वहां खुदाई की गई तो शालिग्राम पत्थर से बनी भगवान विष्णु की चतुर्भुज प्रतिमा प्राप्त हुई। इसके बाद से इस मंदिर को “झुरले गोपीनाथ” के नाम से जाना जाने लगा।

10 फीट नीचे है मंदिर का गर्भगृह

यह मंदिर जमीन से लगभग 10 फीट नीचे स्थित है। श्रद्धालुओं को गर्भगृह तक पहुंचने के लिए करीब 10 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं। गर्भगृह में स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा के हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म हैं।मूर्ति के चारों ओर कॉकरोचों का निरंतर विचरण देखा जा सकता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आने पर डर नहीं, बल्कि भक्ति का अनुभव होता है। आश्चर्यजनक बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में कॉकरोच होने के बावजूद मंदिर में किसी प्रकार की दुर्गंध महसूस नहीं होती।

वैद्यनाथ के बाद गोपीनाथ दर्शन की परंपरा

परली क्षेत्र में हर (महादेव) और हरी (विष्णु) दोनों की पूजा का विशेष महत्व है। वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद झुरळे गोपीनाथ मंदिर में दर्शन करने की परंपरा आज भी निभाई जाती है।हालांकि, अपनी अनूठी पहचान के बावजूद यह मंदिर आज भी कई मूलभूत सुविधाओं का इंतजार कर रहा है। स्थानीय लोग इस अद्वितीय धार्मिक विरासत के संरक्षण और विकास के लिए प्रशासन से पहल करने की मांग कर रहे हैं।

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