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किसानों और जमीन मालिकों को बड़ी राहत: पारिवारिक जमीन बंटवारे का सर्वे अब सिर्फ 200 रुपये में, सरकार का नया नियम लागू

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महाराष्ट्र खबर 24, मुंबई.

Land Survey Charges Maharashtra 2026: महाराष्ट्र सरकार ने किसानों और जमीन धारकों को बड़ी राहत देते हुए जमीन मापी (Land Survey) प्रक्रिया को आसान और सस्ता बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की पहल पर अब पारिवारिक जमीन बंटवारे का सर्वे प्रति हिस्से मात्र 200 रुपये में किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य जमीन मापी में होने वाली देरी, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना है।

खास बातें

  • 90 दिन में नियमित और 30 दिन में फास्ट ट्रैक सर्वे पूरा करना होगा
  • अब नियमित सर्वे (Regular Survey) 90 दिनों के भीतर पूरा करना होगा।
  • फास्ट ट्रैक सर्वे (Fast Track Survey)  30 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा।

फायदा

सरकार का कहना है कि इससे नागरिकों को महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समय व धन दोनों की बचत होगी।

जमीन सर्वे के नए शुल्क

  1. पारिवारिक बंटवारे का सर्वे

आपसी सहमति या कोर्ट के आदेश से होने वाले पारिवारिक जमीन बंटवारे के सर्वे के लिए प्रति हिस्से सिर्फ 200 रुपये शुल्क।

  1. ग्रामीण क्षेत्र (2 हेक्टेयर तक)

नियमित सर्वे शुल्क: 2,000 रुपये

फास्ट ट्रैक सर्वे शुल्क: 8,000 रुपये

  1. शहरी क्षेत्र (1 हेक्टेयर तक)

नियमित सर्वे शुल्क: 3,000 रुपये

फास्ट ट्रैक सर्वे शुल्क: 12,000 रुपये

  1. गुंठेवारी भूखंडों का सर्वे

महाराष्ट्र गुंठेवारी विकास अधिनियम के तहत आने वाले भूखंडों की सर्वे के लिए निर्धारित नियमित शुल्क का डेढ़ गुना शुल्क लिया जाएगा।

सर्वे के दिन अनुपस्थित रहने पर लगेगा जुर्माना

  • आवेदक गैरहाजिर रहा तो

यदि निर्धारित तारीख पर आवेदक खेत या स्थल पर उपस्थित नहीं रहता है, तो उसे मूल शुल्क का 50 प्रतिशत  शुल्क देना होगा।अधिकतम जुर्माना 10,000 रुपये तक हो सकता है।

  • अधिकारी गैरहाजिर रहा तो

यदि तय तारीख पर सरकारी सर्वेक्षक या भूमापक उपस्थित नहीं रहता है, तो आवेदक को अगली तारीख के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।

पुनः जांच (री-सर्वे) के लिए अधिक शुल्क

यदि किसी कनिष्ठ भूमापक द्वारा की गई मापी पर आपत्ति होती है और वरिष्ठ अधिकारी से पुनः जांच करानी होती है, तो आवेदक को मूल शुल्क से 3 से 5 गुना अधिक फीस जमा करनी होगी।

सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थाओं को विशेष छूट

राज्य सरकार ने नए नियमों में सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थाओं को विशेष रियायत भी दी है।

  • अर्ध-सरकारी संस्थाओं को 50% शुल्क छूट
  • पूर्ण सरकारी स्वामित्व वाली जमीनों के सर्वे पर 75% छूट

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि इस फैसले से भूमि अभिलेख विभाग के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।

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