महाराष्ट्र खबर 24, पुणे
Pune Water Crisis News: महाराष्ट्र की आईटी राजधानी पुणे में लग्जरी हाउसिंग सोसाइटियों की चमक-दमक के पीछे बुनियादी सुविधाओं की बदहाल तस्वीर सामने आई है। करोड़ों रुपये कीमत वाले फ्लैटों में रहने वाले लोग गंदे और भूरे रंग के पानी से परेशान हैं। इस मुद्दे को प्रसिद्ध उद्यमी और ‘डील्स धमाका’ के संस्थापक विनीत के ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर उठाया, जिसके बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
नल से निकला भूरा और गंदा पानी
विनीत के ने सोशल मीडिया पर नल से निकल रहे गंदे पानी की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि यह उनकी सोसाइटी में इस सप्ताह मिलने वाला पानी है। तस्वीरों में पानी इतना मैला दिखाई दे रहा है कि वह न पीने योग्य है और न ही नहाने के लिए सुरक्षित माना जा सकता है।उन्होंने बताया कि उनकी सोसाइटी के निवासी हर साल पानी के टैंकरों पर करीब 70 लाख रुपये खर्च करते हैं। वहीं, सोसाइटी में एक-एक फ्लैट की कीमत 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये तक है। इसके बावजूद लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
स्वास्थ्य पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
विनीत के ने चेतावनी दी कि इस तरह का दूषित पानी लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि गंदे पानी के इस्तेमाल से त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारियां और अन्य जलजनित संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि महंगी आवासीय सोसाइटियों की यह स्थिति है, तो रेस्तरां, होटल और सड़क किनारे खाने-पीने की जगहों पर इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता कैसी होगी। उनके अनुसार, पुणे में एक “खामोश स्वास्थ्य संकट” पनप रहा है।
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
पोस्ट वायरल होने के बाद हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने पुणे के साथ-साथ मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे शहरों में भी पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया।
एक यूजर ने लिखा, “साफ हवा नहीं, साफ पानी नहीं और खाने में मिलावट। फिर भी विकास के दावे किए जा रहे हैं।” वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि महाराष्ट्र के बड़े शहरों की तुलना में इंदौर, भोपाल, बड़ौदा और बेलगाम जैसे शहरों में जीवन की गुणवत्ता बेहतर दिखाई देती है।
सरकार और नगर निगम पर उठे सवाल
कई लोगों ने सरकार और स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। यूजर्स का कहना है कि जब नागरिकों से संपत्ति कर, पानी टैक्स और अन्य शुल्क नियमित रूप से वसूले जाते हैं, तो उन्हें स्वच्छ पानी जैसी बुनियादी सुविधा क्यों नहीं मिल पा रही है।
एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि 1.5 करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदने के बाद भी अगर टैंकर के पानी पर निर्भर रहना पड़े, तो यह शहरी विकास मॉडल की विफलता का संकेत है।
बढ़ती कीमतें, घटती सुविधाएं
पुणे सहित महाराष्ट्र के कई शहरों में तेजी से बढ़ती रियल एस्टेट कीमतों के बीच बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल महंगे आवासीय प्रोजेक्ट्स बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वच्छ पानी, बेहतर सीवरेज और मजबूत नागरिक सुविधाएं सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
This is water 🚰 from our society this week
No added preservatives, that’s exactly the colour of water delivered by tankers
We pay ~70L every year for water tankers, if this is the situation for us … imagine what the restaurants and roadside eateries are getting
A silent… pic.twitter.com/ng4Flp6Ajv
— Vineeth K (@DealsDhamaka) June 17, 2026
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