महाराष्ट्र खबर 24, छत्रपति संभाजीनगर,
Shivsena UBT News : महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को एक ही दिन में दोहरा झटका लगा, जब हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर और धाराशिव (उस्मानाबाद) से सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का ऐलान कर दिया। दोनों नेताओं ने पार्टी छोड़ने के पीछे अलग-अलग कारण बताते हुए अपने फैसले को जनता के हित में लिया गया कदम बताया।
आष्टीकर बोले- “एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना में आया हूं”
हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि उन्होंने अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वह “एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना” में गए हैं।आष्टीकर ने बताया कि 18 जून तक उन्होंने और कुछ अन्य सांसदों ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया था, लेकिन उसके बाद हुई कुछ टिप्पणियों और घटनाओं ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया। माना जा रहा है कि उनका इशारा शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की ओर था, जिन्होंने हाल ही में बागी नेताओं के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
विकास कार्यों के लिए फंड की कमी बनी वजह
नागेश आष्टीकर ने कहा कि विपक्ष में रहने के कारण उनके लोकसभा क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। उन्होंने दावा किया कि सांसद निधि के पांच करोड़ रुपये पर्याप्त नहीं हैं और पिछले दो वर्षों में वह अतिरिक्त विकास निधि नहीं ला सके।
उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें बड़ी उम्मीदों के साथ चुना है और क्षेत्र के विकास के लिए संसाधनों की जरूरत होती है। इसी कारण उन्होंने यह फैसला लिया ताकि अपने क्षेत्र के लोगों के लिए बेहतर तरीके से काम कर सकें।
ओमप्रकाश निंबालकर ने भी छोड़ा उद्धव गुट
वहीं धाराशिव से सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर ने भी शिंदे गुट में शामिल होने की घोषणा कर दी। समर्थकों के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में हार और सत्ता से बाहर रहने के कारण जनता के लिए अपेक्षित काम नहीं हो पा रहे थे।निंबालकर ने कहा, “हम चुनाव इसलिए हारे क्योंकि हम सत्ता में नहीं थे। पिछले दो वर्षों में सरकार का हिस्सा नहीं होने के कारण मैं लोगों के लिए पर्याप्त काम नहीं कर सका। इसी वजह से मैंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में जाने का निर्णय लिया।”
अमित शाह और फडणवीस से हुई चर्चा
ओमप्रकाश निंबालकर ने बताया कि इस फैसले से पहले उनकी एकनाथ शिंदे, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा हुई थी।

उन्होंने अपने पिता पवनराजे निंबालकर हत्या मामले का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें इस मामले में निष्पक्ष न्याय की उम्मीद है।
संजय राउत के बयान पर जताई नाराजगी
हाल के दिनों में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने संभावित बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया था।
#WATCH मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बयान “यह तो बस ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है” पर शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा, “आप एकनाथ शिंदे को इतना गंभीरता से क्यों लेते हैं? उन्हें गंभीरता से लेना बंद करें। वे कोई महान व्यक्ति नहीं हैं। वे एक बेईमान नेता हैं… pic.twitter.com/DQ65MHZvAG
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 20, 2026
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नागेश आष्टीकर ने बिना नाम लिए कहा कि किसी को नाराजगी व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।
17 जून की बैठक से गायब थे कई सांसद
राजनीतिक हलकों में चर्चा तब तेज हुई थी जब 17 जून को दिल्ली में हुई शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में कई सांसद शामिल नहीं हुए थे। इनमें नागेश पाटिल आष्टीकर, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव और भाऊसाहेब वाकचौरे के नाम शामिल थे।इसके बाद से ही इन नेताओं के शिंदे गुट में जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल
वर्तमान में लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसद हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में सांसद एक साथ पार्टी छोड़ते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है। आने वाले दिनों में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर और टूट-फूट की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।









