Explainer: महाराष्ट्र TET 2026
महाराष्ट्र में सरकारी शिक्षक बनने के लिए आयोजित होने वाली टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) 2026 परीक्षा एक बड़े विवाद में फंस गई है। करोड़ों रुपये के सुरक्षा इंतजाम और कई स्तरों की गोपनीयता के बावजूद प्रश्नपत्र लीक हो गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पेपर को किसी हाईटेक तकनीक से नहीं बल्कि जूते में छिपाकर प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाला गया था।
Explainer: महाराष्ट्र TET 2026 : क्या है पूरा मामला?
महाराष्ट्र TET परीक्षा के लिए राज्यभर में 1,028 परीक्षा केंद्रों पर करीब 6 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को परीक्षा देनी थी। परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए प्रश्नपत्रों की छपाई उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित एक निजी प्रिंटिंग प्रेस में कराई गई थी।लेकिन जांच में सामने आया कि प्रिंटिंग प्रेस के कुछ कर्मचारियों ने मामूली रकम और भविष्य में जमीन का प्लॉट मिलने के लालच में प्रश्नपत्र बाहर पहुंचा दिए।
आखिर पेपर लीक कैसे हुआ?
पुलिस जांच के अनुसार, पेपर लीक करने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा था।एक कर्मचारी पैकिंग के दौरान चुपके से प्रश्नपत्र का एक सेट अलग कर देता था। दूसरा कर्मचारी उस पेपर को मोड़कर अपने जूते के अंदर छिपा लेता था।इसके बाद तीसरा व्यक्ति प्रेस से बाहर निकलने के बाद जूते से पेपर निकालकर आगे पहुंचाता था।

आखिर में ये प्रश्नपत्र इस रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुंचाए जाते थे। इसी वजह से इस पूरे ऑपरेशन को जांच एजेंसियां “शू-स्मगलिंग मॉडल” कह रही हैं।
चारों सेट कैसे हुए लीक?
आमतौर पर TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं और प्रत्येक पेपर के दो-दो सेट तैयार किए जाते हैं, ताकि परीक्षा वाले दिन किसी एक सेट का रैंडम चयन किया जा सके। लेकिन आरोपियों ने सिर्फ एक नहीं बल्कि तीन दिनों के भीतर सभी चारों सेट बाहर निकाल लिए, जिससे पूरी परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हो गई।
कौन है इस रैकेट का मास्टरमाइंड?
जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का सरगना बिजेंद्र गुप्ता नामक एक फरार पूर्व कोचिंग शिक्षक है।उसकी सबसे बड़ी रणनीति यह थी कि वह पेपर तैयार करने वाले प्रोफेसरों या अधिकारियों को निशाना बनाने के बजाय सीधे उन प्रिंटिंग प्रेस कर्मचारियों से संपर्क करता था, जहां गोपनीय प्रश्नपत्र छपते थे।यही कारण है कि उसने सुरक्षा के सबसे मजबूत घेरे को भी पार कर लिया।
CCTV कैमरे क्यों बने बड़ा सवाल?
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिस समय प्रश्नपत्रों की छपाई चल रही थी, उस दौरान प्रिंटिंग प्रेस के कई CCTV कैमरे बंद थे।यदि कैमरे चालू होते, तो जूते में प्रश्नपत्र छिपाने जैसी गतिविधि रिकॉर्ड हो सकती थी। हालांकि प्रिंटिंग प्रेस प्रबंधन ने सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है।
सोशल मीडिया पर नहीं हुआ था वायरल
NEET पेपर लीक जैसे मामलों से अलग इस बार प्रश्नपत्र टेलीग्राम, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर वायरल नहीं किए गए।जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्रों की केवल फिजिकल कॉपियां तैयार की गईं और उन्हें कथित तौर पर 80,000 रुपये प्रति पेपर के हिसाब से बेचा गया। बाद में अलग-अलग दलालों और कोचिंग नेटवर्क के जरिए इन्हें छात्रों तक पहुंचाया गया।
पहले भी सामने आ चुका है नाम
बिजेंद्र गुप्ता का नाम इससे पहले 2023 की ओडिशा संयुक्त प्रवेश परीक्षा (OJEE) पेपर लीक मामले में भी सामने आ चुका है। पुलिस ने उसकी पत्नी को भी आरोपी की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
अब सरकार क्या करेगी?
इस घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है, जो परीक्षा सुरक्षा में सुधार के सुझाव देगी। सरकार फिलहाल दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रही है:
- पूरी परीक्षा को ऑनलाइन मोड में आयोजित करना।
- प्रश्नपत्रों को प्रिंट कर भेजने के बजाय परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले डिजिटल और एन्क्रिप्टेड तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाना।
महाराष्ट्र TET 2026 पेपर लीक मामले ने यह साबित कर दिया कि केवल तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था ही पर्याप्त नहीं हैं। यदि सिस्टम के अंदर मौजूद लोग ही नियम तोड़ने पर उतर आएं, तो सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली परीक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम और नई परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर टिकी हुई है।
Portal Disclaimer : यह रिपोर्ट उपलब्ध जांच जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित एजेंसियों की जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे।










