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संभाजीनगर में अब फ्यूल पर ‘राशनिंग’,BREAKING NEWS :टू-व्हीलर को ₹200, अन्य वाहनों को ₹2000 तक पेट्रोल-डीजल की सीमा

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छत्रपति संभाजीनगर और जालना दोनों जिलों में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने नई लिमिट लागू कर दी है। डिस्ट्रिक्ट सप्लाई ऑफिसर प्रवीण फुलारी के आदेश के अनुसार अब टू-व्हीलर में अधिकतम ₹200 और थ्री-व्हीलर व फोर-व्हीलर में ₹2000 तक ही फ्यूल दिया जाएगा।इस फैसले के बाद कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जबकि कुछ पंपों ने “फ्यूल खत्म” के बोर्ड भी लगा दिए हैं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि कैन, बोतल या ड्रम में फ्यूल देने पर रोक रहेगी।

राजू राजपूत, छत्रपति संभाजीनगर

जालना और छत्रपति संभाजीनगर जिलों में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती मांग और संभावित कमी को देखते हुए प्रशासन ने फ्यूल की राशनिंग लागू कर दी है। डिस्ट्रिक्ट सप्लाई ऑफिसर प्रवीण फुलारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब टू-व्हीलर में अधिकतम ₹200 तक और थ्री-व्हीलर व फोर-व्हीलर में अधिकतम ₹2000 तक ही फ्यूल दिया जाएगा। इस फैसले के बाद पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

जिले में फ्यूल का पर्याप्त स्टॉक

कई पंपों पर ‘फ्यूल खत्म’ के बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिससे लोगों में घबराहट बढ़ गई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जिले में फ्यूल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन अनावश्यक रूप से अधिक पेट्रोल भरवाने की होड़ के कारण कृत्रिम कमी जैसी स्थिति बन रही है। वहीं पेट्रोल पंप संचालकों को तेल कंपनियों द्वारा एडवांस पेमेंट के बाद ही सप्लाई देने के निर्देश दिए गए हैं। दोपहर 3 बजे तक भुगतान करने वाले पंपों को ही फ्यूल उपलब्ध कराया जा रहा है।

पैनिक होने की जरूरत नहीं

पेट्रोल-डीजल एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिल अब्बास ने कहा कि स्थिति उतनी गंभीर नहीं है, लेकिन लोगों की भीड़ और घबराहट से समस्या बढ़ रही है। कुछ पंपों ने समय पर एडवांस भुगतान नहीं किया, जिसके कारण उनका स्टॉक खत्म हो गया।

जरूरी सेवाओं को पर्याप्त फ्यूल

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एम्बुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं को पर्याप्त फ्यूल उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, कोल्हापुर और सोलापुर की तर्ज पर आगे नियमों में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है।अधिकारियों का कहना है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है, ताकि हालात नियंत्रण में बने रहें और किसी तरह की वास्तविक कमी पैदा न हो।

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