Maharashtrakhabar24.in,नई दिल्ली : ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के ऐलान के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा वैश्विक संकट फिलहाल टलता नजर आ रहा है, जिससे तेल और गैस की कीमतों में राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि, भारत के लिए एक नई चिंता सामने आ गई है, जो कहीं ज्यादा गंभीर साबित हो सकती है।देश के करीब 40 करोड़ लोगों, खासकर किसानों पर इस बार मॉनसून की अनिश्चितता का खतरा मंडरा रहा है। निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट वेदर के ताजा पूर्वानुमान ने आगाह किया है कि 2026 का मॉनसून सामान्य से कमजोर रह सकता है, जिससे कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।
मॉनसून की कमजोर स्थिति का संकेत
मौसम के मौजूदा रुख ने भी विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर गर्मी के महीनों में तापमान तेजी से बढ़ता है, लेकिन इस बार मार्च से अप्रैल के बीच अपेक्षाकृत ठंडक बनी हुई है और कई क्षेत्रों में समय से पहले बारिश भी दर्ज की गई है। मौसम में यह असामान्य बदलाव अक्सर मॉनसून की कमजोर स्थिति का संकेत माना जाता है।
इज़राइल की बमबारी में तबाह तेहरान में अपने सिनेगॉग के बचे हुए हिस्से का निरीक्षण करते ईरानी यहूदी समुदाय के सदस्य pic.twitter.com/HCYquIjO5I
— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) April 7, 2026
“>इज़राइल की बमबारी में तबाह तेहरान में अपने सिनेगॉग के बचे हुए हिस्से का निरीक्षण करते ईरानी यहूदी समुदाय के सदस्य.
बारिश की कमी फसल उत्पादन पर असर
अगर स्काइमेट का अनुमान सही साबित होता है, तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। भारत की बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है, ऐसे में बारिश की कमी फसल उत्पादन घटा सकती है, जिससे खाद्यान्न संकट और महंगाई बढ़ने की आशंका है।विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और किसानों को अभी से सतर्क रहने की जरूरत है। जल प्रबंधन, वैकल्पिक फसलों का चयन और सूखा-रोधी तकनीकों को अपनाना इस संभावित संकट से निपटने के लिए अहम कदम हो सकते हैं।हालांकि, आधिकारिक मॉनसून पूर्वानुमान (IMD) का इंतजार अभी बाकी है, जो स्थिति को और स्पष्ट करेगा। फिलहाल, होर्मुज संकट से राहत के बीच भारत के लिए मॉनसून की चुनौती एक नई चिंता बनकर उभर रही है।












