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महाराष्ट्र के सभी स्कूलों में कक्षा 1 से 10वीं तक मराठी पढ़ाना होगा अनिवार्य, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

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महाराष्ट्र खबर24,मुंबई

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की सभी सरकारी, निजी और अन्य बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के लिए बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने विधानसभा के मानसून सत्र में घोषणा की कि राज्य की सभी स्कूलों में कक्षा 1 से 10वीं तक मराठी भाषा पढ़ाना अनिवार्य होगा। इस नियम का पालन नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह घोषणा भाजपा विधायक अतुल भातखलकर के सवाल के जवाब में की गई। उन्होंने विधानसभा में कहा था कि राज्य की कई स्कूलें मराठी विषय को वैकल्पिक मानकर छात्रों को नहीं पढ़ा रही हैं।दादा भुसे ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र सरकार मराठी भाषा के संरक्षण, प्रचार और प्रसार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसलिए अब सभी स्कूलों में मराठी पढ़ाना अनिवार्य रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जाएगी।

क्यों उठा विधानसभा में सवाल?
यह मुद्दा भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने विधानसभा में प्रश्न के माध्यम से उठाया। पूरक प्रश्न  के दौरान सदस्यों ने आरोप लगाया कि राज्य के कई स्कूलों में मराठी भाषा का शिक्षण नहीं कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर लगाया जाने वाला जुर्माना पर्याप्त नहीं है और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई भी नहीं हो रही है।
इसके जवाब में शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा कि राज्य सरकार मराठी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

22 पृष्ठों में छत्रपति शिवाजी का इतिहास पढ़ाने का फैसला
इसके अलावा दादा भुसे ने स्कूलों के इतिहास पाठ्यक्रम पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को अब पहले की तुलना में अधिक विस्तृत रूप से शामिल किया गया है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद पाठ्यक्रम में शिवाजी महाराज और मराठा शासकों के इतिहास पर 22 पृष्ठ जोड़े गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को उनके योगदान की व्यापक जानकारी मिल सके।  उन्होंने बताया कि पहले देश के अन्य शिक्षा बोर्डों की पाठ्यपुस्तकों में छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को केवल लगभग डेढ़ कॉलम तक सीमित रखा गया था लेकिन अब केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद इसे बढ़ाकर 22 पृष्ठों तक कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मराठी भाषा को मजबूत करने के साथ-साथ नई पीढ़ी तक छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को व्यापक रूप से पहुंचाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी स्कूल निर्धारित नियमों का पालन करें।

विशेष जांच दल रखेगा निगरानी

शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस फैसले के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष जांच दल बनाया जाएगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि पहली से 10वीं तक सभी स्कूलों में मराठी भाषा की पढ़ाई निर्धारित नियमों के अनुसार हो रही है या नहीं।

खास बातें

  • पहली से 10वीं तक मराठी पढ़ाना सभी स्कूलों में अनिवार्य।
  • नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई।
  • पालन सुनिश्चित करने के लिए बनेगा विशेष जांच दल।
  • इतिहास पाठ्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज पर 22 पृष्ठ शामिल।

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