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कर्णपुरा मेले में गांधीजी के वेश में बच्चों का अनोखा अंदाज, QR कोड से हो रही कमाई पर उठे सवाल

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कर्णपुरा मेला छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित प्रसिद्ध कर्णपुरा मेले में इन दिनों भारी भीड़ उमड़ रही है। बड़े-बड़े झूले, आकर्षक दुकानें और विभिन्न प्रदर्शनियां मेले की रौनक बढ़ा रही हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस भी मुस्तैदी से तैनात है। लेकिन इन सबके बीच दो बच्चों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ये बच्चे महात्मा गांधी का वेश धारण कर शरीर पर पेंट लगाए हुए खड़े दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, इनके पास मौजूद डंडे पर QR कोड भी लगा हुआ है, जिसके जरिए लोग डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं। इस पूरे मामले ने बच्चों की सुरक्षा, बाल श्रम और पैसे कमाने के तरीकों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कर्णपुरा मेला छत्रपति संभाजीनगर : गांधीजी के वेश में बच्चे बने आकर्षण का केंद्र

कर्णपुरा मेला छत्रपति संभाजीनगर के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। मेले में बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ पहुंच रहे हैं। झूलों और दुकानों के बीच गांधीजी के वेश में खड़े ये दोनों बच्चे भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। शरीर पर पेंट लगाकर महात्मा गांधी जैसा रूप धारण किए इन बच्चों को देखने के लिए लोग रुक रहे हैं।इन बच्चों के पास एक डंडा है, जिस पर QR कोड लगा हुआ है। लोग इस कोड को स्कैन करके डिजिटल माध्यम से पैसे दे रहे हैं। डिजिटल भुगतान के इस तरीके ने जहां लोगों का ध्यान खींचा है, वहीं बच्चों से इस तरह पैसे लेने के लिए खड़े रहने को लेकर चर्चा भी शुरू हो गई है।

क्या बच्चों के जरिए पैसे कमाना उचित है?

बच्चों का महात्मा गांधी का वेश धारण करना अपने आप में गलत नहीं है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नाटकों में बच्चे अक्सर महापुरुषों की भूमिका निभाते हैं। लेकिन जब बच्चों को सार्वजनिक स्थानों पर शरीर पर पेंट लगाकर लंबे समय तक खड़ा रखा जाता है और इस गतिविधि के जरिए पैसे जुटाए जाते हैं, तो उनकी सुरक्षा और परिस्थितियों की जांच करना जरूरी हो जाता है।

सबसे अहम सवाल यह है कि क्या बच्चे अपनी इच्छा से ऐसा कर रहे हैं या किसी वयस्क के कहने पर इस गतिविधि में शामिल हैं? क्या उन्हें पर्याप्त आराम मिल रहा है? क्या उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर इसका कोई असर पड़ रहा है? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

शरीर पर पेंट लगाने से स्वास्थ्य को खतरा?

शरीर पर इस्तेमाल किए जाने वाले पेंट की गुणवत्ता बच्चों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यदि पेंट त्वचा के अनुकूल नहीं है या लंबे समय तक शरीर पर लगा रहता है, तो त्वचा में जलन, एलर्जी और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। मेले में भारी भीड़, गर्मी और लगातार खड़े रहने जैसी परिस्थितियां भी बच्चों के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं।ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चों के शरीर पर इस्तेमाल किया जा रहा रंग सुरक्षित हो और उन्हें पर्याप्त आराम तथा आवश्यक सुविधाएं मिल रही हों।

बाल श्रम कानूनों के तहत जांच की जरूरत

भारत में बच्चों के काम करने को लेकर स्पष्ट कानूनी प्रावधान हैं। बच्चों की उम्र, गतिविधि की प्रकृति और काम करवाने की परिस्थितियों के आधार पर यह तय होता है कि कोई गतिविधि कानून का उल्लंघन करती है या नहीं। केवल QR कोड के जरिए पैसे प्राप्त करना अपने आप में गैरकानूनी होने का प्रमाण नहीं है।

हालांकि, यदि बच्चों से अनुचित परिस्थितियों में काम करवाया जा रहा है या उनका शोषण हो रहा है, तो संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए।

कर्णपुरा मेला छत्रपति संभाजीनगर : प्रशासन कब जागेगा ?

कर्णपुरा मेले में भारी भीड़ के बीच पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटी है। लेकिन बच्चों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पुलिस, मेला आयोजकों और बाल संरक्षण विभाग को इस मामले की जानकारी लेकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों के साथ किसी तरह का शोषण न हो और उनकी सेहत तथा सुरक्षा से समझौता न किया जाए।

 
गांधीजी के संदेश और बच्चों के अधिकारों पर सवाल

महात्मा गांधी का जीवन सत्य, अहिंसा और मानवीय गरिमा का संदेश देता है। ऐसे में गांधीजी के वेश में बच्चों को भीड़ के बीच खड़ा करके QR कोड के माध्यम से पैसे जुटाने की तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। हालांकि, बिना पूरी जानकारी के किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन बच्चों के हितों की अनदेखी भी नहीं की जा सकती। अब देखना यह है कि संबंधित प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

मुख्य सवाल यही है कि मेले की रौनक और कमाई के बीच बच्चों का बचपन, स्वास्थ्य और अधिकार सुरक्षित हैं या नहीं?

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